विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2020 : कोरोना काल में 30 फीसदी तक बढ़ी आत्महत्या की दर

World Mental Health Day 2020: कोरोना संक्रमण काल के दौरान आत्महत्या की दर तीस प्रतिशत तक बढ़ी हैं। विशेषकर महिलाओं और किशोरियों में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

भारतीय जनगणना एवं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार वर्ष 2019 में प्रतिदिन औसतन 381 आत्महत्या के आंकड़े सामने आए हैं और 2020 तक इन आंकड़ों में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2019 में त्रिपुरा में 728, हिमाचल प्रदेश 584 एवं उत्तराखंड में 516 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए हैं। ये आंकड़े उत्तराखंड को आत्महत्या के मामले में तीसरे स्थान पर रखते हैं।

एसआरएचयू हिमालयन हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. दीपक गोयल का कहना है कि आत्महत्या एक विकृत त्रासदी है। इसके तरीकों के आकलन पर ये पाया गया है कि सबसे ज्यादा फांसी, दूसरे नंबर पर जहर और तीसरे नंबर पर डूबने और जलने के तरीकों का प्रयोग किया गया है।

आत्महत्या के सांकेतिक लक्षण

आशाहीन, निराशाजनक एवं अकेलेपन की बातें करना, कहना कि उनके पास जीवित रहने का कोई कारण नहीं है या समस्याओं से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है।

अपनी वसीयत बनाना या व्यक्तिगत संपत्ति, वस्तुओं को किसी को दे देना, खुद को नुकसान पहुंचाने के साधनों की खोज करना, बहुत अधिक या बहुत कम सोना, कम खाना या बहुत अधिक खाना, अत्यधिक शराब या नशीली दवाओं के सेवन सहित लापरवाही बरतना, सामाजिक संपर्क से बचना, क्रोध या बदला लेने के इरादे को व्यक्त करना, अत्यधिक चिंता या व्याकुलता दर्शाना, मूड में नाटकीयता रहना, दोस्तों और परिवार को अलविदा इत्यादि शब्द कहना, मरने की इच्छा व्यक्त करना, बहुत ज्यादा अपराधबोध और शर्म महसूस करना।

साइकोलोजिस्ट डॉ. मालिनी श्रीवास्तव ने बताया कि जिस व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने जैसे विचार आए तो इसमें बिना देरी किए उसे मनोचिकित्सक की मदद लेनी चाहिए।

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