न्याय का देवता ( God of Justice ) : पोखू देवता मंदिर

उत्तरकाशी न्याय का देवता (God of Justice): हिमालय पर्वत से निकली रुपीण और सुपीण नदी के संगम पर उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लॉक के नैटवाड़ गावं में पोखू मंदिर है । यहां हर पूरे साल लोग शांति और न्याय की तलाश में आते हैं। पोखू देवता के बारे में यह मान्यता है कि उनके दरबार आए पीड़ित लोगों को हाथों-हाथ न्याय मिलता है। न्याय की आस में पोखू दरबार आते है । कहते हैं पोखू देवता किसी को भी निराश नहीं करते। यह उत्तराखंड में एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां सामाजिक प्रताड़ना और मुसीबतें झेलने के बाद निराश लोग न्याय मिलने की उम्मीद में आते हैं। इन्हें न्याय का देवता ( God of Justice ) भी कहा जाता है ।

न्याय का देवता ( God of Justice ) : पोखू देवता मंदिर

पोखू देवता की पूजा-पाठ की विधि ( Method of worship of Pokhu deity )

इस मंदिर में पूजा-पाठ की विधि भी अनूठी है। देवताओं के दर्शन शुभ समझे जाते हैं, लेकिन उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के छोटे से कस्बेनुमा नैटवाड के इस मंदिर में दर्शन अशुभ माने जाते हैं | मंदिर के पुजारी पोखू देवता की मूर्ति की तरफ मुख करने के बजाय पीठ घुमाकर पूजा करते हैं। यहां सुबह-शाम दो बार पूजा होती है। पूजा से पहले पुजारी को रुपीण नदी में स्नान करके सुराई-गढ़वे में पानी लाना होता है। इसके बाद आधे घंटे तक ढ़ोल के साथ मंदिर में पूजा होती है।

दंतकथा (Legend)

एक कथा के मुताबिक किरमिर दानव ने पूरे क्षेत्र में उत्पात मचाया हुआ था । राजा दुर्योंधन ने जनता को उसके अत्याचारों से बचाने के लिए उससे युद्ध किया और पराजित कर उसका सर काट कर टौंस नदी में फेंक दिया ।किरमिर दानव का सिर नदी की दिशा में बहने के बजाये उलटी दिशा में बहने लगा और रुपिनसूपिन नदी के संगम नैटवाड में रुक गया। रुपिन नदी भराटसर (विराटसर) झील से, तो सूपिन स्वर्ण रोहणी हिमशिखरों से निकलती है। राजा दुर्योधन ने किरमिर दानव के कटे सिर को नैटवाड में स्थापित कर वहाँ उसका मंदिर बना दिया । दूसरी दंतकथा के मुताबिक किरमिर (या किलबिल) दानव दरअसल महाभारत के व्रभुवाहन था, जिसका भगवान श्री कृष्ण ने चालाकी से वध कर दिया था ।
तीसरी दंतकथा के मुताबिक यह एक दानव था जो लोगो को मार कर खाता था एक बार एक ऋषि ने इस अपने मंत्रों से पत्थर में बदल दिया और दोनों नदियों के बीच में स्थापित कर दिया तब से यह एक देवता बन गया

कुल देवता (Totems)

उत्तराखंड की पहाड़ियों में बसने वाली कई जनजातियां जैसे कि सिंगतूर पट्टी के नैटवाड़, दड़गाण, कलाब, सुचियाण, पैंसर, पोखरी, पासा, खड़ियासीनी, लोदराला व कामड़ा समेत दर्जनभर गांव के लोग पोखू को अपना कुल देवता मानते हैं।

नेटवाड सिर्फ मोरी से 12 किलोमीटर, चकराता से लगभग 69 किलोमीटर, दिल्ली से 450 किमी० और देहरादून से 200 किमी० दूर पर है। पूरे गांव के चारों ओर सुंदर देवदार और चीड़ के पेड़ है।

केदारकंठा (Kedarkanth) भारत के उत्तराखंड में हिमालय Himalaya की एक पर्वत चोटी

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